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Saturday, May 8, 2010

मां ...शब्द ही काफी है...!



माँ....

ये शब्द शायद सब ने सुना,जाना माना और पहचाना है। दुनिया मैं आज के समय मैं माँ और बच्चे का ही एक रिश्ता है जो शायद कोई स्वार्थ के बिना निभाया जा रहा है।किन्तु कुछ जगह और संजोगो मे ये रिश्ता कलंकित भी हुआ है।शास्त्रों मे भी माँ को भगवान से बड़ा दर्जा दिया गया है।और माँ के बारे मैं भी बहोत कुछ लिखा भी गया है।और बहोत कुछ पढ़ा भी गया,बहोत कुछ सुना भी गया है। मैं यहाँ उन सब की बात नहीं करने वाला।मैं यहाँ बात करूँगा मैंने क्या अनुभव किया है इस रिश्ते से,मैंने काया पाया है और क्या खोया है इस रिश्ते से,

एक छोटा शा बच्चा जो इस दुनिया मैं कदम रखता है,हाथ खोले हुए और बाहें फैलये हुए जिसके पास कुछ नहीं होता,लेकिन इस धरती पर पहला कदम रखते ही वो सब से पहले जो चीज पाता है वो माँ का आँचल है। माँ नहीं होती तो दुनिया कया है शायद उसे या मुज़ जैसे को कभी नहीं पता चलता। इस दुनिया मैं कदम रखते ही मैंने सब से पहले जिस का साथ पाया वो मेरी माँ का था। लोग आज कल जहाँ एक ग्लास पानी पिलाने के पीछे भी आपना स्वार्थ देखते है,वहां मां ने अपने रक्त और प्यार से मुजे पाला पोशा है और वो भी बिना किसी चाहत के बिना किसी स्वार्थ के। शायद यही वजह थी की भगवान भी हमेशा माँ का आँचल पाने के लिए तरसते रहे। आज कल जहां लोगो को सामान्य सी गंध आते ही उलटी होने लगती है, वहीं नाक मे से बहते प्रवाही को और बहोत सी गंदकीओ को जो हर बच्चे मे शामिल थी उसे बिना मुह बिचकाए दूर करती और दूर कर रही है वो मां है। और बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता है वैसे वैसे उस मे भी कई सारी सामाजिक बदिया आती है उसे भी जो दूर करने का जो प्रयास कर रही है वो मां है,वो भी बिना कुछ मांगे बिना मुह बिचकाए.!(आज तो अगर किसी ने सामान्य सा रास्ता आप को दिखा दिया हो तो भी उसके पीछे उसका स्वार्थ छिपा रहता है,की कल मैं रास्ता भूल जाऊंगा तो मुजे कोई रास्ता दिखायेगा।)

चलिए मेरी बात करु तो जब से मै जन्मा तब से लेकर आज तक मुजे हर कदम पर जो रास्ता दिखा रही है वो मेरी माँ है। मुझे जब मेरे घरवाले आगे न पढ़ कर कोई बिजनस करने की बात कह रहे तब सारे घर से लड़ झगड के मेरे साथ अकेले जो खडी रही वो मेरी माँ थी।जब मेरे फैसले सारे घरवालो को गलत लगते थे तब सिर्फ एक ही व्यक्ति को मेरे फैसले सही लगते थे वो मेरी माँ है। जब भी मैं एक कोने मैं जा-जा कर अकेला रोया दुखी हुआ तब सिर्फ एक ही व्यक्ति को पता चला वो मेरी माँ है। जब भी मैं किसी निर्णय मे हारा और नाकामयाब हुआ खुद पर से यकीन हट गया तभी भी एक ही व्यक्ति मेरे साथ खडा दिखाइए दिया वो मेरी माँ है। जिन्दगी के एक मोड़ पर जब मैं मरने की कगार पे था तब भी मुजे जीने की ईक नई राह दिखाई वो मेरी माँ है। आज भी जब भी मै दुखी होता हुं या अकेला पन महसूस करता हुं तब दूर बैठकर भी एक ही व्यक्ति को पता लग जाता है वो मेरी माँ है। मेरे अकेले पन का न जाने उसे कहाँ से पता चल जाता है और उसी वक्त उसका फ़ोन आ जाता..शायद इसलिए वो मेरी माँ है। दुनिया या इस दुनिया के लोग जब भी मुझे ठुकराते है या यु कहे के जब भी धिकारते या नकारते है तब उसके सही मायने बता कर, अपनी ममता का आँचल फैला कर, मेरे सारे गमो को अपना कर अपनी बाहों मैं सुलाया है वो मेरी माँ है। जिन्दगी के हर सही गलत फैसलो मैं जो मेरे साथ है वो मेरी माँ ही है।

मेरा सवाल उन सभी नौ-जवानो से है जो आधुनिकता की अंधी दौड़ मैं है,और अपने आप को आधुनिक कहलाने के चक्कर मै जिसने इस दुनिया मै आने का रास्ता दिखाया है उस माँ को ही वृधाश्रम का रास्ता दिखा रहे है.?क्या उस मां ने आप को इसी दिन के लिये पाल पोस कर बडा किया था.? उन सब से मैं पूछना कहता हूँ की आप की हिम्मत कैसे चलती है मां जैसी ममता की मुर्ति से दूर व्यव्हार करने की.? माँ जैसे भी है वैसी, उसने अपने रक्त से आपको सींचा तो है न.? आप के पैदा होते ही अगर वो आप को रस्ते पर रखाई होती तो..?? या आपके बड़े होते ही वो आपको पढाने लिखाने का खर्च मांगती तो.(भैया इस जनम मैं तो क्या अगर अगला कोई और जनम है भी तो आप अपनी माँ का क़र्ज़ नहीं चूका पाओगे.)आज नाम कमाने कि कोशिश मे हर कोइ लगा हुआ है । एक छोटा भी काम अगर कोई करता है तो उस्के पीछे उस्को कितना नाम या प्रसिध्धि मिलेगी यहि सोचता है,लेकिन मां ही एक ऐसी व्यक्ति है जो बच्चे को जन्म भी देती है लालन पालन भी करती है लेकिन नाम पिता का देती है,ऐसा बलिदान और कोई देता है क्या ? या युन कहे की दे शकता है क्या?

मेरी उन सभी नौजवानों से प्रार्थना है की मधर्स डे जैसा कोई दिन नहीं होता की उसी दिन आप अपनी माँ से प्यार का इजहार करो।भैया मधर्स डे तो हर दिन हर पल होता है।मां ने आप के और अपने परिवार के लिए जो किया है,या कर रहि है उसकी कीमत जानो और उसका मान सामान करो यही उसके लिए बहोत है। कोई कार्ड दे कर या कोई अच्छी सी गिफ्ट दे कर माँ से प्यार जताया नहीं जाता.। माँ को ये सब चाहिये भी नही, उसे चाहिये तो सिर्फ आप का प्यार और आप की खुशी । मेरी मेरे दोस्तों से गुजारिश है की माँ को सच्चे दिल से प्यार करो फिर देखो दुनिया की कोई ताकत तुम्हे हिला और हरा नहीं सकती.।

LOVE U MOM……!

9 comments:

  1. ammaaaaaaa............nice pic n article he ram! lakhva no kantalo aave che

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  2. kids first word mum n life time feeling n only trusted relationship called 'mother'...

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  3. DIlip good but need some mote on that....Aaap ek achhe bete ho ye muze bahot pehle se hi pata hai .lekin yahi baat tumhari janresan ke logo ko samjhao..>!! tc

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  4. Yes,Dilip..you are absolutely right...I am taking care of my beloved mother...she is very happy at 82...great spirit...good writing...thanks

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  5. wow gr8 dear................આખર એક જતાં, કોડ્યું ન આખર કામના,
    મોઢે બોલું ‘માં’, કોઠાને ટાઢક કાગડા !

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  6. Bahu Saras Lakhyu chhe..... Pan taro ek problem chhe ke tane tari fellibg ochi express karta avade chhe...Mate tari aa real fellings ek var tari mummy same express kari joje, aemne aevu lagse ke aemane duniya ni badhi j khishi mali gai.... Keep it up... i m waiting 4 ur next wright up

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  7. AANKH NA KHOONA BHINA KARI DIDHA, DILIPBHAI...

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