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Friday, July 9, 2010

बस ’कोलेज’ का नाम न लेना आई हेट ’कोलेज’ स्टोरी’स .!




विनय: क्या कर रहा है,संजु?

संजु: कुछ नही यार बोर हो रहा हूं, चल ना कही टाईम पास करने चलते है।

विनय: कहा चला जाय यार...ह..ममम....... चल ना कोलेज चलते है, मस्त टाईम पास होगा और मस्त मस्त
लड्किया भी होगी...।

संजु: यप.. कुल, ग्रेट आईडिया..लेट्स मीट धेयर।

ये संवाद मेरे दिमाग मे और जहन मे बहुत दिनो से घुम रहा है। आखिर अब विद्यार्थीओ के मन में कोलेज का क्या मतलब है? विद्यार्थी कोलेज जाते क्यूं है? क्या हो गया है मेरे नौजवान विद्यार्थी मित्रो को.? यदि ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले दिनो मे कोलेज की पूरी व्याख्या ही बदल जायेगी।

आजकल के माहोल ने और पनप रही गुन्डागर्दि ने मुझे फ़िर से इस बात पर सोचने के लिये मजबूर कर दिया है कि क्या अब कोलेज का माहोल पुरे जीवन भर याद करने लायक है?( जैसा हम कर रहे है।) फिल-हाल तो कोलेज की परिभाषा ही पुरी तरह बद्ल चुकी है। ( शायद मै ओलड फेशन कहा जाऊंगा लेकिन मेरे जहन में कोलेज की जो यादें है उसे में हमेशा याद करता हूं।)

मेरे दिल मे ये सवाल ना जाने कब से गूंज रहा है कि आखिर इस कोलेज के वातावरण को किस की नजर लग गयी है? आज कल कोलेज में विद्यार्थी कम और अजब गजब कपडे पहने ’भाई’ टाईप के लोग क्यूं ज्यादा नजर आते है? विद्यार्थी नेताओ की फौज क्यों बढ रही है? कोलेजो मे पढाई की जगह तोड-फोड क्यों हो रही है ? क्या कारण है इस के पीछे ? ऐसे ’भाई’ और विद्यार्थी नेता विशेषत: आर्टस-कोमर्स-सायन्स फ़ेकल्टी वाली कोलेजो में क्युं ज्यादा नजर आते है?

मुजे जो कारण नजर आता है, वो शायद यह है कि कोलेजो मे आने वाले “ विद्यार्थीओ” की संख्या दिन प्रति दिन घट रही है। कोलेज मे दाखिला सब के लिये सुलभ बनाने के उत्साह मे हम ने सब के लिये उच्च शिक्षण के प्रवेश द्वार खोल दिये। इसका नतिजा ये हुआ की कोलेज मे नाम मात्र का दाखिला लेने वालो की संख्या दिनो दिन बढने लगी !
“ हरि को जो भजे सो हरि का होय”, उसी तर्ज पर जो फीस भर सके वो सब कोलेजियन होय। ऐसा प्रतित होने लगा। इसका नतिजा ये हुआ कि आज कल लोगो को पढ्ने के अलावा और बाकी सब कुछ करने का परमीट मिल गया। कोलेज केम्पस मे कोई भी बिना किसी फ़िक्र के बिन्दास घूम सकता है ( भाई अब रोकोगे कैसे जब उनके पास आई.डी.है)। प्रिन्सिपाल की अब पहले जैसी धाक तो रह नही गई ( या रहने नही दी गई, इस परिस्थिति का निर्माण करने के पीछे शायद हमारे माता-पिता या कुछ मेरे जैसे मिडियाकर्मी जिम्मेदार है, जो छोटे से छोटी बात को हेड-लाईन बना के बाई-लाईन ले लेते है।) सरस्वती–धाम मे पुलिस को तो आना मना ही है तो ऐसे मे इन “विद्यार्थीओ” के आई.डी. चेक कोन करेगा? ओर भूल से भी अगर कोलेज प्रशासन ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ़ कोई कार्यवाही करती है तो “ विद्यार्थी एकता जिन्दाबाद” के नारे गुंजने लगते है, और बन बैठे विद्यार्थी नेता कोलेज मे तोड्फोड कर हंगामा खडा कर देते है? और ऐसे विद्यार्थीओ के खिलाफ अपने आप को शरीफ विद्यार्थी मे गिनती करवाते लोग चुप-चाप शरीफ बन्दर की तरह सिर्फ तमाशा देखते रहते है।

मेरे एक मित्र को मैने पूछा (जो फिलहाल कोलेज मे पढ्ता है) कि आज कल इतनी गुन्डा-गर्दी क्यूं हो रही है? क्युं कोलेज का वातावरण बिगड्ता जा रहा है? उसने फ़िल्मी और पुरुष वाली मानसिकता से जवाब देते कहा कि” भैया आज कल की लडकीयो की वजह से ये सब हो रहा है ( मुझे गुस्सा तो बहुत आया लेकिन सुनता रहा ।) कोलेज की लडकीयां कोलेज केम्पस को फेशन परेड का स्थान समझने लगी है, एक कप कोफी,आइसक्रीम या फ़िल्म की खातिर आज कल की लड्कीया किसी भी लड्के के साथ कहीं भी जाने से परहेज नही कर रही है, बिन्दास जो कहलाना है।किसी भी लड्के की गाडी मे बैठ कर कही भी चल देती है। लड्कियो मे अब बोयफ़्रेंड बनाने कि एक होड सी लगी है, इस होड मे वो लड्को का बेक-ग्राउन्ड जाने बिना कही भी चल पडती है, और नतीजा आप के सामने है भैया। ( अब इस को क्या कहु पुरुष विरोधी मानसिकता या स्त्री विरोधी मानसिकता।) खैर बात आगे बढाते है,

आज कल कोलेज का वातावरण बिगाड्ने के पीछे कोलेज के ही कुछ “भुत” पुर्व विद्यार्थीओ का भी बहुत बडा हाथ है। जिनको कोलेज के अन्दर के ही विद्यार्थी पालते-पोसते है। और ऐसे“भुत” पुर्व विद्यार्थीओ के साथ एक बहोत बडी खुशामत खोरो की टोली भी होती है, जो जरुरत पड्ने पर कोलेज के कुछ विद्यार्थीओ को डराती धमकाती है, और उस की टोली मे शामिल कोलेज के विद्यार्थी की मदद करती है।( ओर फिर बदले मे उस से ना जाने क्या क्या करवाते है।) आज कल लडके लडकिंया घर से निकल कर कोलेज ही जाते है ऐसा नही है वो अब ज्यादातर किसी सिनेमा-घरो मे या किसी-ना-किसी कपल-रूम मे पाये जाते है।( मेरी बात की पुस्टि के लिये गुजरात के किसी भी कपल रूम मे या होट्ल मे पडी रेड का इतिहास खगांल लिजीये आप को सबूत मिल जायेगा की ऐसे किस्सो मे ज्यादातर कौन पक्डे जाते है।)

३५-४०% या एक से अधिक बार ट्रायल दे कर पास होने वाले विद्यार्थी कोलेज मे दाखिल नही होगे तो सरस्वती माता की वीणा के तार को कोई नुक्सान नही होगा। जो लोग सिर्फ फैशन की खातिर,घुमने फिरने की खातिर,टाईम पास करने की खातिर या फिर ’स्नातक’ का लेबल लेने की खातिर कोलेज मे मुह उठाये चले आते है उन्हे रोकना ही होगा,नही तो इस आधुनिकता और आधुनिक विद्यार्थीओ के प्रलय के बहाव मे सिर्फ युवाधन ही नही उच्च-शिक्षण की पुरी व्यवस्था डुब कर बह जायेगी।

विषेश सुचना: यह लेख लिख ही रहा था कि खबर मिली है की अहमदाबाद के एक कोलेज के २ लडको ने दारु पीकर कोलेज मे खूब हंगामा खडा किया और तोड फ़ोड की ( खबर जुलाई ९-२०१० की है। जगह अहमदाबाद गुजरात है।)

9 comments:

  1. ye bat to sahi he ke aj kal collage ka vatavaran bigad gaya hai ar isme kahi galtiya collage ke principal ke bhi hai wo log asa karne ke permision de te hai tabhi student asa karte hai or collage mai sabhi student ase nahi hote hai kuch padhne wale bhi hote hai pr us student ko ase dhamal masti karne wale nahi padhne de te hai or rahi bat ladkiyo ke to ladakiya to jo fashion hoge wase kapde to phanage he na isme unka bhi koi dosh nahi hai by the way gud artical keep it up

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  2. Dilip i m agree wd u bt its part nd parcl f life...studnts r nt sers abt thr studies.pan jemne bhanvu che te bhane j che...ya ur rght ke girls bhadej fare che..pan unfrtntly aj clg life ma sara ne khrab loko made che,prem bhi thay che...atle aa bhadhu thvnu...baki girls na drsng ni vat che to modrn dress to phrshe...they wnt 2 look gud nd hot...

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  3. true but one thing i wanna ask u, kya college mai below 18 jatai hai,nahee na tou mein aap ish galatfami mein kyou hai vidhartee college mein he bigetai hai,ladkiya tou kahee bhi mil jatee hai agar us particuler vidhrtee ko bigdna hai tou,ha ager time pass ke baat hai tou i am 100% agree with u its a place where u don,t have to see ur pocket and can enjoy a full flim of even 6 hours...hahaha...

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  4. Dilipji aap ne jo college ke chhatra ki bat kahi hai vo bilkul sahi hai aaj kal ke ladke-ladkiya college me padhne kam time pass karne jyada aate hai .... iske liye keval chhatra hi jimevar nahi hai uske sath uske mata-pita or teachar bhi utne hi jimevar hai agar college ka vatavaran badal na hia to chhatra ke sath sath usse jude har koi ko apne aap badalna padega...... agar yah nahi ho sakta hai to fir natija aap ke samne hai ki aisi college mai se kaise chhatra bahar aa rahe hai.

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  5. nice bhaiya :)
    ---purav

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  6. @ पारुल, सचिन, भारती जी,राजेश और पुरव, आप सभी के अभिप्रायो का स्वागत करता हूँ | एक बात है जो मैं आप सब को बताना चाहूँगा की मैंने यह लेख किसी जाति विशेष को ध्यान में रख कर नहीं लिखा है, जो भी वातावरण आज कल के कोलेजो में मुझे दिखा वो ही लिखा है | फिर भी अगर किसी को बुरा लगा हो तो मैं तहे दिल से क्षमा चाहूँगा |

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  7. BHUT BADHIYA BAAT AAPNE APME IS LEKH KE JARIYE KAHI HAI. LIKHTE RAHE TAKI BHUT SE ISSUE SE HAME RUBRU HONE KA MOKA MIL SAKE.

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  8. अनु जी सुक्रिया !

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  9. Ekdam sachchi vat. Pan aama koi j kai nahi kari shake. karanake aavi so called "Bindas"(mawali) image collegian nu style statement bani gai chhe. Ane jya aavu badhu na chaltu hoy te college desi ane kharab ganay chhe. i think jo vidyarthi ne mata pita taraf thi vadhare padti chhut aapva ma na aave ane temno final destinatioan shu chhe teni samaj jo aapva ma aave to kadach aavu nai bane. ane aa tyare j shakya banshe jyare vidyarthi no best frnd sauthi pahela tena mother ke father hashe.

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