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Friday, April 16, 2010

मारे शु.??? (मुझे क्या.??)


मारे शु.??? (मुझे क्या.??)

ये शब्द से मेरे गुजराती मित्र शायद सब से ज्यादा परिचित होंगे।लेकिन जो नहीं जानते उन्हें थोडा समझाता हुं।
मारे शु.?का हिंदी मैं अर्थ होता है मुजे क्या.?
ये शब्द गुजरात में बहोत ही ज्यादा प्रचलित है और जगह भी प्रचलित होगा लेकिन मुझे पता नही।कभी लोग अपनी जवाबदारियो से बचने के लिए तो कभी आपना फायदा निहारने क लिए ये शब्द का इस्तेमाल करते है..लेकिन जब भी मैं ये शब्द सुनता हूँ तो मुजे बहुत अखरता है।

रास्ते मैं किसी का “एक्सिडेन्ट” हो गया है,वो बिचारा दर्द से कहराह रहा है,फ़िर भी घंटो तक अपने सेलफोन पर बतियाने वाले लोग एक सामान्य सा फ़ोन १०८ को नहीं कर शकते.? मारे शु.?? भले वो आदमी मर जाता है.?? उसके परिवार मैं भले ही एक वो ही कमाने वाला है.? मारे शु?अरे भाई कभी इस मारे शु से आगे भी सोच कर देखिये.?जवाब मिलता है.केम मारे शु? शु काम मारे फोन करवो जोइए।(क्यूँ मुजे फ़ोन करना चाहिए) खाली-पिली पुलिस के लफड़े मैं कौन गिरे भाई.?? मेरा उन सभी से सवाल है अगर उस अनजान व्यक्ति की जगर अगर आप का कोई परीजन होता तो क्या आप यही कहते.?उस वक्त तो आप समाज और देश दुनिया को बोलते हो कैसे मतलबी लोग है? पर वो ही चीज जब दुसरो के साथ होती है तो “मारे शु” हो जाती है.?

बात आज कल के सब से हॉट- टोपिक पोलिटीक्स यानि की राजनीती की।सब कहते है की भाई नेता गंदे है।पोलिटिक्स गुंडों का काम है।बस बोलना है लेकिन जब वोट की बात आती है तो फिर वो ही मारे शु.?? गर्मी बहोत है वोट डालने कौन जाये ? सब लोग गुंडे है। इन्हे वोट कौन दे.? अरे कभी खुद भी इस मैदान मैं उतर कर देखो। अगर आप के घर मैं कचरा पड़ा हुआ है और आप की कामवाली बाई नहीं आती है तो आप को ही कचरा साफ करना होगा वर्ना आप का ही घर आप को बदबू देगा.उस वख्त आप नहीं कह सकेंगे मारेशु.?उसी तरह कभी इस देश को भी अपना घर मान के देखिये। भैया कोई भी चीज हो पहले अपने फर्ज से अदा रहिये फिर अपने हक़ के बारे मैं बात करिए.! अपने आप को बदलने की शुरुआत करिए।देश और दुनिया बाद मैं बदल लेना।शुरुआत तो करिए।

और कई बाते है जैसे की कई दिनों से घर मे पानी नहीं आ रहा है। नेता से लेकर सामान्य कार्यकर तक सब को गरिया देंगे लेकिन उनके खिलाफ फ़रियाद कोई नहीं लिखवाएगा।मैं ही क्यूँ जायुं,सब के घरो मे तो पानी नहीं आता।अरे भाई दुसरो का ख्याल मत करो सिर्फ अपने घर का ख्याल करो और एक बार लीगल कम्प्लेन कर के तो देखो।देश मैं से भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा,लोगो के सामने तरह तरह की दलीले और भासण बाजी हो जाएगी।लेकिन जब खुद का काम कही रुकता है तो भैया जो पैसे चाहिये वो लेलो मेरा काम जल्दी से खतम कर दो। मुजे दुसरो से मतलब नहीं है।भैया मतलब नहीं क्यूँ है?आप के जैसा ही हर कोई सोचता है,और भ्रष्टाचार का राक्षस दिन-ब-दिन बढ़ता है।इस से मुझे क्या.?(मारे शु.?) किसी के झग्डे मे गवाही देने को कहो तो फिर वही मारे शु.?? भले ही उस ने सब कुछ देखा और सुना है.? लेकिन जब उन्के साथ ऐसा होता है तो उनहि का नजरीया और शब्द दोनो बदल जाते है। किसी से दो शब्द प्रेम के कहने से उसका भला हो जाता है फ़िर भी उसके लिये कहेंगे नहीं।मुजे उससे क्या.?? मुजे क्या फायदा मिलेगा.?? अरे भैया कभी बिना फायदा का भी काम कर के देखो.??

बात मेरे कुछ मीडिया वाले दोस्तों की।हर कोई एक दुसरे के चैनल के कंटेंट को बुरा बता कर अपने आप को अलायदा कहते है।लेकिन बात तो वो दुसरो की तरह ही करते है।हाल ही मैं सानिया और आई.पी.एल. पर सारी मीडिया कूद पड़ी थी। लकिन हर चैनल वाले अपने डीसकशन मैं यही चलाते थे की भैया सानिया और आई.पी.एल को इनता महत्त्व देना चाहिये की नहीं?पर भाईसाह्ब आप उन्ही पे चर्चा कर के एक घंटे का प्रोग्राम बना के साबित क्या करना चाहते है?पहले आप का चैनल खुद तो देखिये।सुबह से लेकर शाम तक आप ने भी सानिया को ही चलाया है क्यूँ.?? टी.आर.पी. का जो सवाल है?
आप सब से मैं गुजारिश करता हूँ की आप खुद ये बंध कर के तो देखिये..! हर बार दुसरो को जिमेवार बना के आप क्यूँ आपनी जिमेदारियो से बचना चाहते है? कभी कोई काम बिना फायदे के भी तो कर के देखिये।बड़ा शकून मिले गा.!!

एक मशहूर शायर ने कहा है..वो ही मैं भी दोहरहा रहा हूँ..

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही,मेरा मकसद है की ये सूरत बदलनी चाहिए,घनघोर अंधेरों ने घेरा,हर एक तन हर एक मन,ये अँधेरा चीर एक शमां तो जलनी चाहिए,

ये बात सब पर लागु नहीं होती ये बाबा दिलीपानंद के अंगत विचार है।आप को इस से असहमत होने का पूरा हक़ है।अगर नहीं भी है,तो मारे शु.???

कर के देखो.??

Tuesday, April 13, 2010

क्षमा याचना..!!


कुछ निजी कारणों से नइ पोस्ट नहीं लिख पा रहा लिहाजा दोस्तों कुछ समय के लिए अपने इस ना चीज दोस्त को क्षमा करे.!जल्द ही एक नए विषय पर और एक नयी बात लेकर आप के सामने उपस्थित होऊंगा |

Sunday, March 14, 2010

!!..ऐ मेरे दिल तु कहां जा रहा.!!


बचपन से लेकर आज तक एक प्र्श्न मेरा पिछा नही छोड रहा,आखिर मे हम लोग क्या पाना चाह्ते है.?
हमारी मन्जिल क्या है.? हमे जीवन मैं क्या बनना है?
हम लोग बेवजह एक अनजानी चीज के पिछे क्यों दौड लगाये हुए है?
और उस अनजानी चीज को पाने के लिये हम न जाने कितने सच और न जाने कितने रिश्तो की बली चढा देते है.?
मुझे हमेशा से यहि बात सताती रही की आखिर ये सब किस लिये और क्युं? एक कब्रस्तान के दिवार पर लिखी चन्द पन्क्ति ओ ने मेरे सारे प्र्श्नो का जवाब दे दिया और मेरी आखें खोल दी। आप भी गौर फ़रमाए गा “मंजिल मेरी यहि थी,बस जिन्दगी गुजार दी यहां तक आते आते.”

क्या आप को नही लग रहा की इन्ही चन्द पन्क्तिओ मे जीवन की सारी सच्चाई बयान हो गई है. इन पन्क्तिओ को पढने के बाद हमेशा से मेरा दिल मुझ से एक सवाल कर रहा है.?मेरा दिल बार-बार मुझ से पुछ रहा है की ऐ मेरे दिल तु कहां जा रहा है?तेरी मंजिल क्या है.?एक बार तो जरा नजर उठा के देख सामने “कब्र” नाम की मेह्बुबा बाहें फ़ैलाये तेरा इन्तजार कर रही है। ना तु किसी जश्न मै सामिल है और ना ही कोई तेहवार का लत्फ़ उठा पा रहा है। ईद हो य़ा होली सब कुछ कलेंडर मे ही मना रहा है। ये सब तो ठिक था पर हद तो तुने वहां कर दी की जब कीसी के प्यार से भरा शादी का न्योता तुझे मिलता है और तु उसके बच्चे होने के वक्त भी नहीं जा पा रहा है? दिल मेरा हमेशा मुझ से सवाल करता है की ऐ मेरे दोस्त तु कहां जा रहा है,ऐ मेरे दिल तु क्या चहता है?

लाखो की तन्खवा पा रहा है पर खुद के लिये फुर्सद के चंद लम्हे नही नीकाल पा रहा है.? प्रेमिका से हंस के दो मिनीट से ज्यादा बतिया नही पाता और दो मिनीट से ज्यादा फोन चले तो खुद काट देता है,लेकिन बॉस का फोन तु कहां काट पा रहा है.? तेरे दोस्तों-रिश्तेदारोंकी लिस्ट तो काफी लम्बी है पर तु कीसी के घर कहां जा पा रहा है? अब तो घर की सारी खुशियां और उत्सव ख्वाबों मे ही मना रहा है? दिल मेरा बार बार मुझ से यहि पुछ रहा है की ऐ मेरे दोस्त तु कहां जा रहा है? ऐ मेरे दिल तु क्या चाहता है? किसी को शायद ये पता नही की ये राह किस ओर जा रही है,कहाँ जा के रुकेगी ? थके हुए है हर राही और लोग, छुट्कार हर कोई चाह रहा है।लेकिन फ़िर भी ये दुनिया का बोझ उठाये चले जा रहा है? किसी को सामने धन का अंबार दिख रहा है,तो कोई सोने की चमक और हीरो की दमक के पिछे भाग रहा है,किसी को मिलियोनेर तो किसी को बिलियोनेर बनना है,पर घर मे बुढे मा बाप कौन शी रोटी खा रहे है मेरे दोस्त तु ये कहां पत्ता लगा पा रहा है?ईसी अनजानी दौड़ में वृधाश्र्मो की संख्या दिनों दिन बढ़ा रहा है|मेरा दिल बार बार मुझ से पुछ रहा है की ऐ मेरे दोस्त तु कहां जा रहा है। बहन की राखी नेट पे और नोटॊ के बंड्ल जेब मे रख कर ना जाने तु कौन से रिश्ते कमा रहा है,? ऐ मेरे दोस्त तु कहां जा रहा है.? किसी की एक छोटी सी गल्ती पे तु जोर-जोर से चिल्ला रहा है,पर नाम कमाने के चक्कर मे तु ना जाने अपनी कितनी गल्तियां छुपा रहा है?मां-बाप को चढे बुखार से तुझे कहां मतलब है,तुझे तो सनसेक्स का बुखार खाये जा रहा है।

आप ही बताईए मेरे दोस्तो क्या जिना इसी का नाम है.? दिल मेरा बार बार मुझ से यहि पुछ रहा है की ऐ मेरे दोस्त तु कहां जा रहा है?ऐ मेरे दिल तु क्या चाहता है? जिंदगी की आखरी मंजिल तो कब्र ही है, तो फ़िर तु उसे पाने के चक्कर मे इतने पाप क्युं कमा रहा है? पैसो के चक्कर मे जिंदगी के अनमोल रिश्ते क्युं गवां रहा है?

"बाबा दिलीपानंद"

Saturday, March 6, 2010

॥सब मोह माया है। जिस को जैसा समझ मै आया है॥


॥ गुरु गोविन्द दोनो खडे का को लागु पाय।
बलिहारी गुरु आप की गोविन्द दियो बताय॥

ये छंद शायद हम सभी ने कभी न कभी तो सुना ही होगा।
पर आज यही शब्दो को आधुनिक गुरु ओ ने कलंकित कर दिया है। आज यहि गुरु गोविन्द को नहीं बताते,बताते है भोग-विलास कैसे होता है,करोडो रुपये कैसे कमाये जाते है? जि्न चीजो से पहले गुरु मुक्ति दिलाने की बाते किया करते थे वो ही चीजे आज यहि गुरु खुद तो भोग हि रहे है,और साथ ही अपने शिष्यों को भी इस भोग विलाश मै साझीदार बना रहे है।
पहले बात एक सफ़ेद दाढी धारी बाबा की,जिसे अभी तक गुजरात के लोग ना ही भुल पाये है,और नेता ना ही भुना ना छोड रहे है।ये बाबा कपडे तो सफ़ेद पहनता है लेकिन दुनिया के सारे काले काम करने से जरा भी नहीं हिचकिचाता। इस के उपर संमोहन करने के साथ-साथ काले जादु करने का भी आरोप लगता रहा है,फ़िल हाल इस के उपर दो मासुम के कत्ल करने का भी आरोप लगा हुआ है,इस के लड्के पर लडकियों के साथ रास लीला रचा ने का भी आरोप लगा है,और हाल ही मै दिल्ही मै गिरफ़्तार हुए बाबा भीमानंद के सेक्स रेकेट मै भी इसके जुडे होने कि बात भी कही जा रही है।लेकिन ये बाबा ऐसे घिनौने कृत्य करने से जरा भी हिचकिचाता नहि,मीडिया को कुत्ता कह्ता है,और अगर खुद को एक महिने मै बेकशुर ना साबित कर सके तो एक मीडिया समुह के यहां चपरासी बनने की भी बात कह्ता है,(ये बात अलग है कि आज इस बात को कई महिने हो गये है)।इस पर अभी भी केस चल रहा है,लेकिन बात यहां ये है कि ऐसे गुरु बनाने से भी क्या फ़ायदा? जिस का खुद दामन पाकसाफ़ ना हो,वो दुसरो को क्या मोक्क्ष दिलायेगा?और एक हम है कि एक नहीं तो दुसरा सही कि तर्ज पर गुरुओ को दुढंते ही रहते है और मोक्क्ष की आशा मै मारे मारे एक गुरु से दुसरे गुरु के दरवाजे पर भटक रहे है,पर हमे ये पता ही नहीं कि:

क्षणमहि सज्जनसंगतिरेका । भवति भवार्णवतरणे नोका ।

( अर्थात: सज्जनो के साथ घडी भर की संगत भी भवसागर की नैया पार करा सकती है।)

स्वामी विवेकानंद जी ने भी तो यही कहा है" आप को आप का विकास अन्दर से ही साधना है,आप को कोई दूसरा सीखा नहीं सकता,आप को कोई आध्यातमिक नहीं बना सकता,आप कि आत्मा के अलावा आप का कोई गुरु नहीं है।" और एक हम है कि गुरुओ कि तलाश मैं ना जाने किस किस क्रिपालुन्नद,नित्यानंद,भीमानंद को गुरु मान भगवान को प्राप्त करने के सपने संजोते रहते है,(भाई जो सेक्स,शराब,सत्ता,सुन्दरी के अलावा कुछ सोच ही नहि सकता भला वो क्या हमे मोक्क्ष दिलाये गा)

अब बात करे क्रिपालुन्नद स्वामी की तो हाल ही मै इनका नाम उत्तरप्रदेश मै इनही के आश्रम मै हुइ भगदड के कारण काफ़ी चर्चा मै है। १ प्लेट,१ रुमाल १ लड्डु,और २० रुपये की खातीर लोगो ने परमात्मा और मोक्क्ष को भुल ऐसि दौड लगाई की ३२ लोगो ने जाने गवां दी,कीसी ने अपनी आंख का तारा खोया,तो किसी का पुरा का पुरा कुल ही बरबाद हो गया। और ताजुब की बात यह है की इस घट्ना को बाबा क्रिपालुन्नद भगवान की मरजी बताते है,कह्ते है कि " हमने इन लोगो को नहि बुलाया,ये लोग खुद ही आये थे,और म्रुतको को आश्रम की तरफ़ से एक एक लाख रुपये दिये जायेंगे "(वाह रे भगवान तेरी लीला इन्सान के जान की किमत सिर्फ़ एक लाख रुपये.!!आज कल तुभी सस्ते इन्सान बनाने लगा क्या,??इतनी जाने गई क्या फ़रक पड्ता है..स्वामी जी ने थोडि इन्हे बुलाया था वो तो खुद हि मरने आ गये थे )
और हम पागल लोग ऐसे स्वामी के पास मोक्क्ष कि आशा रख्ते है,(अरे भाई भगवान ही हमे कहता है ना की ऐसे स्वामी ओ के पास जाओ,भगवान कि मर्जी होगी )स्वामी जी ने फ़िल-हाल तो अपना पल्ला झाड लेने कि कोशिश की है,देख्ते है कितना कामयाब हो पाते है..सोचने का वक्त आप का और हमारा है। नही तो वो दिन दुर नही की ऐसे स्वामी हमारे जान की भी किमत लगा देंगे और कहेंगे की हमने तो मोक्क्ष दिला दीया।

स्वामी भीमानंद के बारे मै बात करे तो,ये स्वामी तो इन सब से भी बडे निक्ले। इनका जाल तो अमरीका से ले कर दिल्ही तक फ़ेला हुआ था,इनकी अपनी एक गुफ़ा थी,इस के अलावा और ढेर सारे कारनामे है इस बाबा के। ये बाबा सेक्स रेकेट चलाता था,इस के पास से जो डायरी मीली है उस मै कोल-गलर्स का सारा हिसाब किताब रखा जता था।(बताइए ये बाबा हमे कौन से मोक्क्ष का रस्ता दिखाते थे? फ़िल हाल तो ये बाबा जैल मै है,और अपने मोक्श का रस्ता तलाश रहे है।)

जब इतने बाबाओ की बात कि है तो,लगे हाथ स्वामी नित्यानंद कि भी बात कर ही लेते है।ये यु तो लोगो को चरित्र का पाठ पढाते थे। पर जब से इनके चरीत्र का खुलसा एक दक्षिण-भारतीय चेनल ने किया है तब से ये अद्र्श्य हो गये है। ये बात और है कि ये बाबा अपने ही शिष्य परमानंद पर आरोप लगा रहे है,कि ये सब उसी ने षड्यंत्र किया है।सच-झुठ का खुलाशा तो बाद मै होगा..फ़िल हाल ये बाबा अन्तरध्यान हो गये है। इन का नेटवर्क पुरे देश मै फ़ैला हुआ था। यहां तक की जब ये गुजरात की मुलाकात के लिये वडोदरा शहर आये थे तो यहां के मुख्यमंत्री इन बाबा कि प्रशंशा करते नही थकते थे। आज यहि मुख्यमंत्री मीडिया से मुह छिपाते घुम रहे है(आज कल के बाबाओ की यही तकनीक भी बन गई है कि बडे बडे नेता ओ और फ़िल्मसितारों को अपना भक्त बनाओ,बाकी भगत अपने आप खिचे चले आयेंगे।)

सवाल ये है कि हम एसे बाबाओ पर भरोशा क्युं कर लेते है? क्या बडे-बडे राज नेता इन के कदमो मे गिरते है इस लिये?या इस लिए के ये घंटो तक भक्ति चेनल पर प्रभु का गुणगान कर ते रहते है!या इन बाबाओ का मार्केटींग बहुत असरदार होता है?और क्या किसी बाबा पे भरोसा करने का यही मापडंड है? हम ऐसे बाबाओ पर भरोसा करते ही क्यों है?हमे चाहिये क्या.?? हमे हेरान परेशान करने के लिये जितने ये बाबा लोग जिमेदार है उतने ही क्या हम नही? कब तक हम सरकार और बाबा ओ पर आरोप लगा कर खुद के कशुर से बचते रहेंगे। हर बार ऐसा कोइ ना कोइ बाबा आता है,कीसी ना कीसी रूप मे हमे ठग जाता है।फ़िर थोडे दिन हम शोर शराबा करते है,और फ़िर भुल जाते है। आप और हम को ही ऐसे बाबाओ से बचने के कोई ठोस प्रयाश करने होगें।नही तो वो दिन दुर नही,जब ये बाबा लोग देश को और हम सभी को बेच खायेगे।

आज के ज़माने मे देश मे कितने ऐसे लोग है की जो शास्त्रों को सही ढंग से समझते होंगे? जो थोड़े बहुत लोग शास्त्रों को जानते भी है वो ब्रम्ह,माया,और प्रक्रुति जैसे कुछ ही शब्दो का प्रयोग करते है।जो दिमाग मे सिर्फ एक अस्मंजश ही पैदा करते है। आज कल के ये गुरु लोग शास्त्रों को छोड़ बाकी सभी चीजो का ज्ञान देते है।और मैं तो कहता हूँ की जो शास्त्र हर इंसान को उसके सही या बुरे वक्त मैं काम न आये वो शास्त्र ही कैसा.?और कीस काम का.? और अगर शास्त्र केवल सन्याशियों को ही समझ मैं आता हो,ऊन्ही को प्राप्त हो तो उसका क्या फ़ायदा?गृहस्थ जीवन गुजार रहे लोगो को जो धर्म सलाह सुचन न दे सके तो उस धर्म का क्या मतलब.?जो शास्त्र जब इंसान अपना सब कुछ छोड़ जंगल मैं जा बैठे,या फिर अपना गृहस्थ जीवन त्यागे तभी उपयोग मैं आता हो,तो क्या करना है ऐसे शास्त्र का,और क्या करना है ऐसे धर्म का?

मजदुर की मजदुरी,रोगीओ के रोग,दुखीओ के दुख:को दुर न कर सके वो धर्म कीस काम का? पश्च्याताप मे दलित के दारिद्र्य मे,काम,क्रोध,और विलाश के आवेग मे,जीवन के अंधकार मे,और अंत मे मृत्यु की काल रात्रि मे जो शास्त्र,या गुरु ह्रदय मैं आशा का एक दीप जला कर रास्ता न दिखा सके तो फिर कीस काम के?और अगर यही शास्त्र और गुरु का कार्य है, तो हम जैसे दुर्बलो को इनकी क्या जरुररत है.??? हम क्यों फिजूल मैं ऐसे मोक्ष और गुरु की तलाश मैं ढोंगी ओ के बस मैं हो जाते है।
आने वाले समय मैं आप को बहोत से ऐसे बाबा मिल जायेंगे जो जलते हुए कोयले पे चलेंगे,हाथ मैं से फल स्वरूप प्रसाद देंगे।किसी की बीमारी सिर्फ हाथ फिरा कर मिटा देंगे।एक दिन मैं पैसे दुगने कर देंगे। और न जाने कौन कौन से चमत्कार करेंगे.?पर क्या कभी हमने ये भी सोचा है की क्या राक्षस चमत्कार नहीं कर सकते..??

जाते जाते गीता का ही एक श्लोक आप सब के लिए है.शायद ये लेख के अनुरूप भी है इस लिए लिख रहा हूँ,.

कलैब्यं मास्म गम;पार्थ नैत त्वययुपपद्यते ।
क्षुद्र ह्रदयदौर्बल्यम त्यकत्वोतिष्ठ परंतप॥

अर्थात:
( हे पार्थ तुम ये ना-मर्दानगी छोड़ दो,तुम को ये शोभा नहीं देता है,ह्रदय की इन हिन् निर्बलताओ का त्याग कर,हे परंतप तुम खड़े हो जाओ.)

॥ये लेख स्वामी दीलीपा नंद द्वारा लिखा गया है॥

Friday, February 26, 2010

कविता का संघर्ष..


"एक लड़का हो जाता तो तेरा कुल चल जाता" ये बात शायद शहर के लोगो ने कम सुनी है,लेकिन भारत के गाँव मैं ये बाते आज भी आम है,भले ही सुनीता विलियम्स चाँद पे कदम रख आई है, और दुनिया उनके कदम चुमते और प्रशंसा करते नहीं थक रही, फिर भी कहीं न कही लडको को कुल चलाने वाला कुल दीपक माना जा रह है, भले ही वो डकैती कर रहा है,चोरी कर रहा हो,(भाई कुल का नाम तो ऐसे भी तो रोशन होता है),

आज मैं यहाँ ऐसे कुलदीपक की बात नहीं करने जा रहा मैं यहाँ बात करने वाला हूँ एक ऐसे कुलदीपक की की जो एक वख्त उसी के माँ बाप बुझा देना चाहते थे,.और आज वो ही कुल दीपक उन के घर को उजाला दे रहा है,उनके नाम को देश दुनिया मैं मशहुर कर रहा है,फर्क सिर्फ इतना है की वो लड़का नहीं लड़की है, जिसका नाम माता पिता ने प्यार से कविता रखा है,जिसे आप ने अक्सर दूरदर्शन के धारावाहिक कसक मैं साक्षी के रूप मैं देखा होगा.स्टार प्लस की एक बहोत ही मशहुर धारावाहिक साईं बाबा मैं आप ने तातिया की पत्नी के रूप मैं देखा होगा...इस के आलावा जाने मने कई धारावाहिकों मैं कविता ने आपनी अलग ही छाप छोड़ी है...चलिए देखते है कविता आज जहा पहोची है,वहां तक पहुचने के लिए उन्हों ने कितना संघर्ष किया है..

कविता का जनम राजस्थान के शहर जयपुर से करीबन १५० किलो मीटर दूर बंदी कुई मैं हुआ..उसके जनम क पूर्व ही उसके इस धरती पे आने और न आने मैं प्रश्न चिन्ह लग गए थे.कविता की दादी चाहती थी की कविता का जनम न हो क्यूँ की पहले से ही घर मैं और २ लडकियां थी,कविता की माँ भी मजबूर थी वो आपनी सास की बात मान अपना बच्चा गिराने हॉस्पिटल पहोच गई,फिर जैसे फिल्मो मैं होता है वैसे न जाने कहाँ से कविता की माँ को हुआ की नहीं मुजे इस बच्चे को जन्म देना ही है और वो हॉस्पिटल से वापस आ गई.(कविता की कहानी भी जैसे वो धारावाहिकों मैं मोड़ लेती है वैसे ही मोड़ ले रही है. कविता जन्म से पहले ही मरने जा रही थी लेकिन एक चमत्कार ने ही उसे बचा लिया.)
बस यहीं से कविता का सफ़र सुरु होता है.कविता के बाद उसके और दो भाई हुए,लेकिन कविता उन सब से अलग और सब से अनोखी थी,

कविता का जनम भले ही एक छोटे से गाँव मैं हुआ था लेकिन उसकी परवरिश और पढाई लिखाई.भारत के आर्थिक राजधानी मुंबई मैं हुई है, कविता ने microbiology and बायो केमिस्ट्री से डबल मास्टर किया है,(नाम पढने मैं जितना मुश्किल है,उतनी ही उसकी पढाई भी होगी..) कविता का संघर्ष पढाई के साथ नहीं ख़तम होता वो जब पढ़ रही थी तब भी उसकी महगी किताबो को लेकर अक्सर उसे ताने सुनने पड़ते थे,लिहाजा उसने किसी पर बोज नहीं बन ने का फैसला किया और अपनी पढाई का खर्च खुद उठाया. दिन को पढाई और रात को कॉल सेंटर मैं जॉब.(क्या कोई कुल दीपक यानि की लड़का ऐसा करता.?)
कविता का संघर्ष यही ख़तम नहीं होता...उसे अपनी परीक्षा देने के बाद एक और परीक्षा देनी पड़ी. बी.एस.सी. के अंतिम साल परीक्षा मैं सफल होने बावजूद उसका परिणाम फ़ैल आया..कविता को यकीं था की वो परीक्षा में पास है लिहाजा उसने अपनी सच्चाई साबित करने की ठानी,परीक्षा बोर्ड के खिलाफ एक साल तक उसने लड़ाई लड़ी,आखिर कार कविता ने विजय हासिल की और उसका परिणाम पास निकला..!
कविता के संघर्ष गाथा यहीं ख़तम नहीं होती,उसने बचपन से ही कुछ अलग करने की ठानी थी लिहाजा सायंस की विद्यार्थिनी होने के बावजूद एक्टिंग को अपना कैरियर बनाने की गांठ बाँध ली.पढाई ख़तम करने के एक साल तक संघर्ष करने के बाद पहला ब्रेक स्टार प्लस की साईं बाबा सीरियल में मिला.तब से कविता ने पीछे मुड के नहीं देखा एक बाद एक सफलताएँ हासिल की.

दिनरात संघर्षो की बिच घिरी कविता ने हर संघर्ष को हँसते हुए लिया.और हर मुश्किल को पार कर अपनी मंजिल पाई.कविता आपने संगर्ष को कुछ इस तरह बयाँ करती है."मैं हमेशा से इश्वर मैं आशथा रखती हूँ,मैं खुद एक धार्मिक इन्सान भी हूँ.मेरे साथ जो भी हुआ,या हो रहा है वो सब अच्छा ही है,हर संघर्ष से मैं ने कुछ न कुछ तो सिखा ही है,और आगे भी सीखूंगी..इन संघर्षो की वजह से मैं अपने आप को एक विशेष इंसान महसूस करती हूँ."

कविता आज चामुंडा फिलिम के साथ कम कर रही है,इसके इलावा स्टार प्लस की शकुन्तला, एन.डी.टी.वी. की ज्योति,सोनी टी.वी.की सी.आई.डी. और कलर्स टी.वी.की बालिका वधु,और स्वामिनारायण जैसे धारावाहिकों मैं कम कर चुकी है.

सदियों से ये परंपरा चली आ रही है की हम देवी ओ को तो पूजते है लेकिन वो ही देवी सामान लड़की जब अपने ही घर मैं माँ,बहन या पत्नी के रूप मैं आती है तो उनसे बदसलूकी का एक भी मौका नहीं छोड़ते .(सब की बात नहीं है..कई लोग ऐसा नहीं करते फिर भी ज्यादातर लोग मेरी बात से सहमत होंगे)..
आज कविता के रिश्ते दार और घर वाले कविता पे गर्व करते है,(ये वो ही लोग है जो एक दिन कविता के जनम पे ही एक सवालिया निशान लगा दिया था)..

कविता आज मशहुर है इस लिए उनकी कहानी मैं उनकी जुबानी सुनपाया(मशहुर होने के बाद बहोत कम लोग सच्चाई भी बताते है.) बाकि और ऐसी न जान कितनी मासूम लडकिया जनम से पहले ही भगवान को प्यारी हो जाती है.(सिर्फ कुलदीपक पाने की आशा मैं)शायद वो जनम लेती तो मैं या मेरे जैसा कोई और उस लड़की की महानता क गुणगान गाते नहीं थकता.
मेरी ये आर्टिकल पढने वाले सभी से गुजारिश है.की कुलदीपक पाने की आशा मैं लडकियों को इस पुर्थ्वी पर जनम लेने का अधिकार न छीने.न जाने उन मेंसे कौन सुनीता विलियम या कविता शर्मा बनजाये..और आप के कुल को आप के कुलदीपक से ज्यादा उजागर करे..!!

Friday, February 19, 2010


सनसेक्स रोज नया हाइ और लो बनता है साथ मैं कई लोगो की धड़कने भी बढ़ता और कम करता है..!!

शायद ये बात सब लोगो को पता है ,लेकिन आज कल इसी संसेक्स के इस व्यापर मैं डूबे लोगो को और सब से अधिक नौ जवानों को एक नई परेशानी यानि टेनसन दी है.! सुबह एक घंटे का टाइम जल्दी हो गया है,शायद इसी लिए इन सब की जीवनकी नैया असत व्यस्त हो गई है,कोई रोज सुबह गाय को चारा डाल के शेर मार्केट मैं पैसे कमाने के सपने संजोता था, तो कोई घर पे दूध लाके चाय की चुस्की के साथ बीवी के प्यार की अनोखी मुस्कान के स्वाद चखता था,लेकिन जब से ये समय सुबह ९ बजे का हो गया है तब से न तो गाय मिलती है न ही दूध लेन का टाइम मिलता है.? मिलता है तो सिर्फ गुस्से से लाल हुई बीवी के चहरे की मुस्कान ! क्यूँ की अब दूध लेके उसका पति नहीं आता,.और गाय लेके खड़ा होने वाला ९.३० से पहले नहीं आता.(पति अब पुन्य नहीं करता ) बच्चो को स्कूल छोड़ने भी नहीं जाया जाता...नफे मैं बाजार रोज रोज अप- डाउन कर के मुसीबतों मैं बढ़ोतरी कर रहा है..

जैसे इतनी तकलीफे कम हो उसमैं अब एक और चीज की बढ़ोतरी होने जा रही है, सुनाइ दिया है की अब शनिचर को भी ट्रेडिंग होगी..(भला ये शेयर मार्केट वालो ने शादी नहीं की होगी.>????)हर रोज उनके नए नियम शेयर मार्केट के साथ जुड़े लोगो की लाइफ मैं नए हाई लो बना रह है..

शेयर मार्केट मैं ट्रेडिंग करने वाले रमेश भाई का कहना है की "जब से सुबह का समय हुआ है बीवी सही से जवाब नहीं देती..रात को जल्दी सो जाना पड़ता है सुबह जल्दी उठाना पड़ता है..अब हमारी सेक्स लाइफ भी इसी संसेक्स ने दोजख बना के रख दीया है.."
रात को बीवी या गर्ल फ्रेंड को लेके लॉन्ग ड्राइव् पे नहीं जा सकते, क्यूंकि सुबह जल्दी उठाना है..अगर जाते है तो बजार मिस हो जाता है और नहीं जाते तो बीवी या गर्लफ्रेंड मिस हो जाती है..( कोई तो समजे नौजवानों की ये मुसीबात)अब तो वीक एंड पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है...अगर शनिचर को ट्रेडिंग सुरु हो गई तो शेयर मार्केट से जुड़े नौजवानों की शादी सुदा जिन्दगी और उसमें काम करने वाले कुवारों की लव लाइफ दोनों ही खतरे मैं? एक ट्रेडिंग हाउस मैं कम करने वाले सन्नी का कहना है की "भाई हर शनिचर और इतवार को मैं अपनी गर्लफ्रेंड को लेके घुमने जाया करता था लेकिन जैसे ही मैंने उसे बतया की अब तो शनिचर को भी बाजार खुलेगा तो उसने मुजसे बात करना ही बंध करदिया"
शेयर मार्केट ने कई ओ की जिन्दगी बनाई है और कई ओ की जिन्दगी बिगाड़ी है..लेकिन उनके पीछे शेयर मार्केट मैं आने वाले उतार चड़ाव जिमिवार थे लेकिन अब लोगो की लाइफ बन ने और बिगड़ने के पीछे शेयर मार्केट का समय शायद जिमीदार होगा...
आने वाले दिनों मैं शायद इसी शेयर मार्केट के समय को लेकर शादीयां टूटने लगे और प्रेमी बिछड ने लगे तो आश्चर्य चकित मत होइए गा..भाई शेयर मार्केट मैं अब सब कुछ पोसिबल है...

जाते जाते थोड़ी शेयर मार्केट और क्या क्या गम देता है वो भी शुन लीजिये ..
१] लगातार कम्पूटर के सामने बैठने से आँखे कमजोर होती है..
२]शरीर अकड़ जाता है..!!
और न न जाने कितनी बीमारिया इस ने दी है..लेकिन लोग इसे छोड़ नहीं सकते क्यूंकि फास्ट मनी विधआउट महनत जो है..
शेयर पर सेर : इस शेयर न दिए न जाने कितने गम..समय बढ़ा के किया सेक्स लाइफ को कम और आगे न जाने कितने दिखायेगा ये रंग..!!